रोज़ के हर फॉर्म की सही जानकारी, हिंदी में

जल ही जीवन है पर निबंध

पूरा निबंध — विद्यालय व प्रतियोगिता के लिए तैयार · LikhoBharo

निबंध (पूरा)

भूमिका: 'जल ही जीवन है' — यह कहावत बिल्कुल सत्य है, क्योंकि जल के बिना पृथ्वी पर किसी भी प्रकार का जीवन संभव नहीं है। मानव शरीर का लगभग 60 प्रतिशत भाग जल ही है। पीने से लेकर खेती, उद्योग, बिजली उत्पादन और सफ़ाई तक — हर कार्य जल पर निर्भर है। फिर भी विडंबना यह है कि जिस जल पर हमारा पूरा जीवन टिका है, उसी के प्रति हम सबसे अधिक लापरवाह हैं।

जल की उपलब्धता और संकट: पृथ्वी का लगभग 71 प्रतिशत भाग जल से ढका है, परंतु उसका 97 प्रतिशत से अधिक भाग समुद्र का खारा पानी है। पीने योग्य मीठा जल मात्र 2–3 प्रतिशत ही है, जो नदियों, तालाबों और भूजल (भूमिगत जल) में है। बढ़ती जनसंख्या, नगरीकरण और जल की बर्बादी से यह सीमित भंडार तेज़ी से घट रहा है। भारत के कई शहरों और गाँवों में भूजल स्तर हर वर्ष नीचे जा रहा है; कई क्षेत्रों में गर्मियों में महिलाओं को मीलों दूर से पानी लाना पड़ता है। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यदि यही स्थिति रही तो आने वाले वर्षों में जल संकट युद्ध का कारण भी बन सकता है।

जल बर्बादी के कारण: हमारे घरों में नल खुला छोड़कर दाँत साफ़ करना, वाहन धोने में सैकड़ों लीटर पानी बहाना, टपकती टंकियाँ ठीक न करवाना — ये सब बर्बादी के रोज़मर्रा के उदाहरण हैं। खेती में बाढ़-सिंचाई (flood irrigation) से आधा पानी व्यर्थ जाता है। उद्योग अपना गंदा पानी बिना साफ़ किए नदियों में छोड़कर उपलब्ध जल को भी दूषित कर देते हैं। वर्षा का पानी, जो मुफ़्त में मिलता है, वह सड़कों पर बहकर नालों में चला जाता है, क्योंकि उसके संचयन की व्यवस्था हम नहीं करते।

जल संरक्षण के उपाय: जल बचाने का सबसे उत्तम उपाय है वर्षा जल संचयन (rainwater harvesting) — छत का पानी गड्ढे या टैंक में इकट्ठा करके भूजल तक पहुँचाना। हर घर में टपकते नल तुरंत ठीक करवाने चाहिए, बाल्टी से नहाना शावर की अपेक्षा कम पानी लेता है, और रसोई-बगीचे में पानी का पुनः उपयोग संभव है। खेती में टपक सिंचाई (drip irrigation) अपनाने से आधे से अधिक पानी बचता है। सरकार के 'जल शक्ति अभियान' जैसी योजनाएँ तभी सफल होंगी जब हर नागरिक इसे अपना कर्तव्य समझे।

उपसंहार: जल अमूल्य संपदा है — सोने-चाँदी से खरीदा नहीं जा सकता। 'बूँद-बूँद से घड़ा भरता है' यह कहावत जल पर पूरी तरह चरितार्थ होती है। आज की हर बचाई हुई बूँद कल की पीढ़ियों की सुरक्षा है। आओ, संकल्प लें कि न स्वयं पानी बर्बाद करेंगे, न दूसरों को करने देंगे।

नोट: यह निबंध पूरा और तैयार है। विद्यालय के काम में इसे समझकर अपने शब्दों में लिखने का अभ्यास भी करें — अपने शब्दों की भाषा से लिखना हमेशा अधिक प्रभावी होता है।