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प्रदूषण पर निबंध

पूरा निबंध — विद्यालय व प्रतियोगिता के लिए तैयार · LikhoBharo

निबंध (पूरा)

भूमिका: प्रदूषण आज मानव सभ्यता के सामने खड़ी सबसे गंभीर समस्याओं में से एक है। प्रदूषण का अर्थ है — प्रकृति के स्वच्छ वातावरण (वायु, जल, मिट्टी) का मानवीय गतिविधियों से दूषित हो जाना। विकास की अंधी दौड़ में हमने वह हवा ज़हरीली कर दी जिसमें हम साँस लेते हैं और वह पानी गंदा कर दिया जिसे हम पीते हैं। यदि समय रहते यह नहीं रुका तो आने वाली पीढ़ियाँ स्वच्छ वातावरण को केवल पुस्तकों में पढ़ेंगी।

प्रदूषण के प्रकार और कारण: प्रदूषण मुख्यतः चार प्रकार का होता है। (1) वायु प्रदूषण — वाहनों व कारख़ानों का धुआँ, पराली जलाना और निर्माण-कार्यों की धूल इसके कारण हैं। (2) जल प्रदूषण — कारख़ानों का रसायनयुक्त पानी, घरों का गंदा पानी और प्लास्टिक कचरा नदियों-तालाबों में मिलना। (3) मृदा प्रदूषण — अत्यधिक रासायनिक खाद, कीटनाशक और प्लास्टिक का मिट्टी में दबना। (4) ध्वनि प्रदूषण — लाउडस्पीकर, हॉर्न और मशीनों का अत्यधिक शोर। इन सबके पीछे एक ही मूल कारण है — प्रकृति का अंधाधुंध दोहन और अपने कचरे के प्रति हमारी लापरवाही।

प्रदूषण के दुष्प्रभाव: दूषित हवा से दमा, फेफड़ों की बीमारी और एलर्जी बढ़ रही है; बड़े शहरों में सर्दियों में साँस लेना मुश्किल हो जाता है। गंदा पानी हैज़ा, पीलिया और टाइफाइड जैसी बीमारियाँ फैलाता है। मृदा प्रदूषण से अनाज में भी ज़हरीले तत्व पहुँच रहे हैं। प्रदूषण से जलवायु परिवर्तन तेज़ हुआ है — अनियमित वर्षा, बाढ़, सूखा और बढ़ता तापमान इसी की देन हैं। ओज़ोन परत का क्षरण और अनेक जीव-जंतुओं का विलुप्त होना भी इसी शृंखला की कड़ियाँ हैं।

समाधान और हमारा कर्तव्य: इस समस्या का हल केवल सरकार के आदेशों से नहीं, हर नागरिक के व्यवहार से आएगा। अधिक से अधिक पेड़ लगाना और उनका संरक्षण करना, सार्वजनिक परिवहन व साइकिल अपनाना, कचरे को सूखा-गीला अलग-अलग डालना, प्लास्टिक की थैली की जगह कपड़े का थैला उपयोग करना, पानी की बर्बादी रोकना और पटाखों व लाउडस्पीकर का शोर घटाना — ये छोटे-छोटे कदम मिलकर बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं। सरकार की ओर से भी प्रदूषण मानकों का कठोर पालन, हरित ऊर्जा (सौर व पवन) को बढ़ावा और नदियों की सफ़ाई जैसे कदम आवश्यक हैं।

उपसंहार: यह याद रखना होगा कि पृथ्वी हमें अपने पूर्वजों से विरासत में नहीं मिली, बल्कि यह हमारे बच्चों की अमानत है। प्रदूषण मानव-निर्मित समस्या है, इसलिए इसका समाधान भी मानव के ही हाथ में है। संकल्प और सतर्कता से हम फिर से साफ़ हवा, स्वच्छ पानी और हरी-भरी धरती पा सकते हैं।

नोट: यह निबंध पूरा और तैयार है। विद्यालय के काम में इसे समझकर अपने शब्दों में लिखने का अभ्यास भी करें — अपने शब्दों की भाषा से लिखना हमेशा अधिक प्रभावी होता है।